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बदलाव को लेकर हमेशा रहें तैयार

बदलाव को लेकर हमेशा रहें तैयार

बदलाव को लेकर हमेशा रहें तैयार

हम बचपन से एक टोपी बेचने वाले व्यक्ति की कहानी सुनते रहे हैं | उसकी टोपियां बंदर ले लेते हैं  |  बंदर इंसान की नकल करते हैं  |  उनकी  इस कमजोरी का फायदा उठाकर वह अपनी टोपियाँ  वापस पा लेता है | अब वही टोपीवाला अपना अनुभव बेटे से शेयर करता है |  बेटा टोपी का गट्ठर टोपी का  उठाकर दूसरे गांव जाने के लिए चल पड़ता है | बीच रास्ते में एक झपकी लेने के बाद वह देखता है के सारे बंदर उसकी टोपियाँ  पहनकर बैठे हैं | वह भी पिता की तरह अपने सिर की टोपी जमीन पर जोर से फेंकता है पर आश्चर्य की बात है कि एक बंदर भी उसकी नकल नहीं करता ! तभी पास की झाड़ी से एक बंदर जिसके सर पर टोपी नहीं थी , आकर उस फेंकी हुई टोपी को लेकर भागने लगता है | वह बंदर कहता है कि हमने अपनी गलतियां  से सीखकर अपना सिलेबस बदल लिया है | अब हम इंसानों की नकल नहीं करते हैं| यह कहानी बताती है कि हमें समय के हिसाब से बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए | जो इंसान बदलाव को अस्वीकार कर देता है , उसे आखिर में हार का सामना करना पड़ता है |

 

 

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